Thursday, July 23, 2009

vishwas

विश्वास
मैंने तुम्हारा हाथ थामा
साथ निबाहने के लिए
फ़िर मेरे स्पर्श मात्र से तुम
क्यो कापे कापे हो
दोस्त,
ये तुम्हारा अविश्वास है
मुझ पर भी और ख़ुद पर भी

कर सको तो विश्वास कर लो
मुझ पर भी और ख़ुद पर भी
नही तो दोस्ती के दायरों में
बदनाम होकर मुझे कहना पड़ेगा की
तुम मेरी दोस्ती के काबिल ही नही
दोस्त ।

Tuesday, July 21, 2009

कल से एक विशेष : केवल दोस्ती पर नई शुरुआत करेंगे दोस्त ...... तब तक शुभ रात्रि

गीत


गीत


जाना कहा था राही मै जा राही कहा हूँ

सिमटा हुआ किसी का मै प्यार का जहा हू


मंजिल मुझे पुकारे क्यो भटके कदम तुम्हारे

तुम पास आओ मेरे दे दू तुम्हे सहारे

अब संभला जाएगा मै गिरता हुआ एबा हू.......

मै जा राही कहा हू .....


वो आसमा जमी पर देखो झुक रहा है

मेरे साथ आज उसका प्यार रो रहा है

अब जिन्दगी ko uski mai mot ki सजा हू .......

मै जा राही कहा हू.......