गीत
जाना कहा था राही मै जा राही कहा हूँ
सिमटा हुआ किसी का मै प्यार का जहा हू
मंजिल मुझे पुकारे क्यो भटके कदम तुम्हारे
तुम पास आओ मेरे दे दू तुम्हे सहारे
अब संभला न जाएगा मै गिरता हुआ एबा हू.......
मै जा राही कहा हू .....
वो आसमा जमी पर देखो झुक रहा है
मेरे साथ आज उसका प्यार रो रहा है
अब जिन्दगी ko uski mai mot ki सजा हू .......
मै जा राही कहा हू.......
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