Saturday, October 17, 2009

दोस्त

हजारो दोस्तों की संगत में
अब तक रहा था दिल
पर दोस्त तेरी दोस्ती
उन सबसे जुदा है
तेरी दोस्ती में जाना हमने
क्यो लोग दोस्त को
कहते खुदा है ।
एक हलचल हर वक्त
जहन में रहती है
क्या भूलू क्या यद् करू
जिन्दगी कशमकश में रहती है ।
मेरे मन का ठहराव , आजकल
गति में रहता है
मन का हर तनाव
तेरे ख्यालो से ढहता है ।

में जानती हूँ मेरी राह
तेरी राहो से अलग है
फ़िर भी क्यो हर बार
मेरे विचारों की गली
तेरे संदेशो की तकती राह है
तेरे साथ बैठकर
ढेरो बात करने की
क्यो में चाह है ।

तेरे एहसास से मुझे दोस्ती
गगन जैसी नजर आई
जहां हजारो जीवन है
पर नही है कोई परछाई
आजकल हर कदम पे रुक ,हम
खामोशी से बात करते है
हर नजर हमको ही टोके है
हम अनायास ही डरते है

अब छोड़ दो इस तरह
हलचल मचाना दोस्त
बेहतर साथ के लिए
जिन्दगी की प्यारी सी
सौगात के लिए ।

6 comments:

  1. प्रेम समर्पण संग में कह दी बेहतर बात।
    प्रेम से बढ़कर है नहीं दुनिया मे सौगात।।

    शुभकामना

    सादर
    श्यामल सुमन
    www.manoramsuman.blogspot.com

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  2. ek samvedasheel kavita ke liye badhayi, deepawali mangalmaya ho.

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