हजारो दोस्तों की संगत में
अब तक रहा था दिल
पर दोस्त तेरी दोस्ती
उन सबसे जुदा है
तेरी दोस्ती में जाना हमने
क्यो लोग दोस्त को
कहते खुदा है ।
एक हलचल हर वक्त
जहन में रहती है
क्या भूलू क्या यद् करू
जिन्दगी कशमकश में रहती है ।
मेरे मन का ठहराव , आजकल
गति में रहता है
मन का हर तनाव
तेरे ख्यालो से ढहता है ।
में जानती हूँ मेरी राह
तेरी राहो से अलग है
फ़िर भी क्यो हर बार
मेरे विचारों की गली
तेरे संदेशो की तकती राह है
तेरे साथ बैठकर
ढेरो बात करने की
क्यो में चाह है ।
तेरे एहसास से मुझे दोस्ती
गगन जैसी नजर आई
जहां हजारो जीवन है
पर नही है कोई परछाई
आजकल हर कदम पे रुक ,हम
खामोशी से बात करते है
हर नजर हमको ही टोके है
हम अनायास ही डरते है
अब छोड़ दो इस तरह
हलचल मचाना दोस्त
बेहतर साथ के लिए
जिन्दगी की प्यारी सी
सौगात के लिए ।
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प्रेम समर्पण संग में कह दी बेहतर बात।
ReplyDeleteप्रेम से बढ़कर है नहीं दुनिया मे सौगात।।
शुभकामना
सादर
श्यामल सुमन
www.manoramsuman.blogspot.com
Very nice.........
ReplyDeleteek samvedasheel kavita ke liye badhayi, deepawali mangalmaya ho.
ReplyDeletethaks
ReplyDeletenice.narayan narayan
ReplyDeleteswagat hai blog jagat me
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